देहरादून। गढ़ी कैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड का नाम अब शहीद जसवंत सिंह रावत के नाम से पहचाना जायेगा। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध में असाधारण वीरता दिखाने वाले उत्तराखंड के जांबाज जसवंत सिंह रावत को मरणोपरांत महावीर चक्र से भी अलंकृत किया गया था। सेना के अधीन आने वाले महिंद्रा ग्राउंड का नाम अब शहीद जसवंत सिंह के नाम पर रखा गया है। इस खुले मैदान में अब तारबाड़ भी की जायेगी और प्रवेश के लिए गेट भी लगाया जायेगा। इस कार्य का शुभारंभ उत्तराखंड सब एरिया के जीओसी मेजर जनरल बलराज मेहता व शहीद जसवंत सिंह के भाई विजय सिंह ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर ग्यारहवीं गढ़वाल राइफल्स व थर्टी राजपूत राइफल्स के मध्यम मैत्री फुटबाल मैच भी खेला गया। जीओसी मेजर जनरल मेहता ने कहा कि गढ़वाल राइफल्स की चौथी बटालियन के राइफलमैन जसवंत सिंह रावत ने 62 के भारत-चीन युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। चीनी सेना ने 17 नवंबर 1962 को अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर घुसपैठ करते हुए हमला किया था। चीनी सेना के हमले से बार्डर पर तैनात गढ़वाल राइफल्स के जवान भी मुश्किल में पड़ गये थे। चीन सेना ने इस युद्ध में मीडियम मशीन गन से भारतीय सेना पर फायरिंग की थी। लेकिन चीनी सैनिकों के इरादों की राह में राइफलमैन जसवंत सिंह फौलाद बनकर खड़ा हुआ। उन्होंने अकेले ही चीनी सेना को 72 घंटे तक आगे बढ़ने से रोक कर रखा। युद्ध समाप्ति के बाद खुद चीन की सेना ने भी राइफलमैन जसवंत सिंह की वीरता का गुणगान किया था। मरणोपरांत उन्हें वीरता पदक महावीर चक्र से अलंकृत किया गया था। अरुणाचल में आज भी शहीद सैनिक के नाम पर स्थापित जसवंत गढ़ में सेना के जांबाज आवाजाही करते वक्त नमन करना नहीं भूलते हैं। सेनि मेजर जनरल एसपी कंवर, कर्नल एस के दत्ता, कर्नल एएस चौहान, कर्नल विनीत सिंह, मेजर रवि कुमार, मेजर विजय तोमर आदि भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।