देहरादून, गढ़वाल का विकास डॉट कॉम। गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज (जीडीएमसी), देहरादून ने क्रिटिकल केयर सेवाओं को उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
दिसंबर 2024 में जीडीएमसी के एनेस्थीसियोलॉजी और क्रिटिकल केयर विभाग में अत्याधुनिक ईसीएमओ (एक्स्ट्रा कॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजिनेशन) मशीन स्थापित की गई। मैक्वेट कंपनी के प्रतिनिधि ने मशीन की स्थापना के साथ इसका प्रदर्शन भी किया। यह उन्नत जीवन रक्षक प्रणाली गंभीर रूप से बीमार मरीजों को हृदय और श्वसन संबंधी सहायता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है और यह अस्पताल की क्षमता को हृदय और फेफड़ों की विफलता के मामलों को संभालने में क्रांतिकारी रूप से बदल देगी।
इवेंट और प्रतिभागी
इस अवसर पर एनेस्थीसियोलॉजी और क्रिटिकल केयर विभाग के प्रमुख फैकल्टी सदस्य, जैसे कि आईसीयू इंचार्ज डॉ. अतुल कुमार सिंह, डॉ. शोभा, डॉ. सत्यांश, डॉ. निधि, डॉ. इक़रा, और डॉ. साक्षी, उपस्थित थे। इसके अलावा, पोस्टग्रेजुएट छात्र, आईसीयू और ओटी तकनीशियन, और एनपीसीसी स्टाफ भी मौजूद थे। सभी ने मशीन के प्रदर्शन में सक्रिय रूप से भाग लिया, ताकि इसे जीडीएमसी की संचालन प्रक्रियाओं में सहजता से शामिल किया जा सके।
ईसीएमओ: एक जीवन रक्षक तकनीक
ईसीएमओ मशीन मरीज के खून को शरीर के बाहर ऑक्सीजन देकर वापस भेजती है, जिससे फेफड़े और हृदय को आराम और ठीक होने का समय मिलता है। यह तकनीक गंभीर श्वसन तंगी, हृदय विफलता और पोस्ट-ऑपरेटिव जटिलताओं के इलाज में बेहद प्रभावी है। मैक्वेट ईसीएमओ मशीन में उन्नत ऑक्सीजनटर, इंटीग्रेटेड मॉनिटरिंग सिस्टम और सुरक्षा अलार्म जैसी अत्याधुनिक विशेषताएं हैं, जो सटीकता और मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। प्रदर्शन के दौरान, यह दिखाया गया कि इस मशीन का उपयोग एआरडीएस (एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम), हृदयगति रुकने और जटिल सर्जरी जैसी आपात स्थितियों में कैसे किया जा सकता है।
प्रशिक्षण और विशेषज्ञता
मशीन की स्थापना के दौरान, जीडीएमसी के फैकल्टी और स्टाफ ने बड़ी रुचि दिखाई। डॉ. अतुल कुमार सिंह, आईसीयू इंचार्ज, ने ईसीएमओ मशीन के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे मरीजों की देखभाल में “एक ऐतिहासिक कदम” बताया। फैकल्टी सदस्य डॉ. शोभा और डॉ. सत्यांश ने इस तकनीक को कुशलतापूर्वक संचालित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। पोस्टग्रेजुएट छात्रों और तकनीशियनों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया, इसे अपनी विशेषज्ञता को बढ़ाने का एक शानदार अवसर माना।
चुनौतियां और स्टाफ की आवश्यकता
हालांकि ईसीएमओ मशीन एक क्रांतिकारी उपकरण है, लेकिन इसे सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित स्टाफ की आवश्यकता होती है। परफ्यूज़निस्ट, जो ईसीएमओ मशीन को संचालित करने और एक्स्ट्रा-कॉर्पोरियल सर्कुलेशन को प्रबंधित करने में कुशल होते हैं, की नियुक्ति अत्यावश्यक है। फैकल्टी ने इस दिशा में नए पद सृजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मशीन को 24/7 उपलब्ध कराया जा सके और इसे आईसीयू वर्कफ्लो में प्रभावी रूप से शामिल किया जा सके।
खर्च और पहुंच
ईसीएमओ थेरेपी की लागत मशीन के रखरखाव और संचालन की उच्च मांग के कारण काफी अधिक है। वर्तमान में, यह सेवा आयुष्मान भारत योजना के तहत कवर नहीं है, जिससे यह आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए कम सुलभ हो जाती है। जीडीएमसी की प्रबंधन टीम इस थेरेपी को अधिक किफायती बनाने के विकल्पों पर विचार कर रही है, जबकि संचालन लागत का संतुलन बनाए रखने का प्रयास कर रही है।
जीडीएमसी का भविष्य
ईसीएमओ मशीन की स्थापना जीडीएमसी की मरीजों के स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के लिए उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकी अपनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह न केवल अस्पताल को भारत के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों की सूची में शामिल करता है, बल्कि इसे उत्तराखंड में एक प्रमुख स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के रूप में भी स्थापित करता है। अस्पताल ने फैकल्टी, छात्रों और तकनीशियनों की दक्षता बढ़ाने के लिए नियमित कार्यशालाओं और व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन करने की योजना बनाई है।
निष्कर्ष
जीडीएमसी में ईसीएमओ मशीन का जुड़ाव क्रिटिकल केयर में एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि स्टाफिंग और उपचार लागत जैसी चुनौतियों को हल करना बाकी है, लेकिन प्रबंधन, फैकल्टी और स्टाफ के सामूहिक प्रयासों ने एक उज्जवल भविष्य की उम्मीद जगाई है। यह उन्नत तकनीक न केवल अस्पताल की सेवाओं को ऊंचा उठाती है, बल्कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए जीवन की नई उम्मीद भी देती है।