स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में स्वास्थ्य सेवाएं धराशाई

– पौड़ी में देहलचौरी में हुई बस दुर्घटना के घायलों को नहीं मिल पाया जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार, अस्पताल में न दवा न लाइट

स्वास्थ्य मंत्री दें तत्काल इस्तीफा: सूर्यकांत धस्माना

देहरादून, गढ़वाल का विकास डॉट कॉम। प्रदेश के स्वास्थ मंत्री धन सिंह रावत के गृह जनपद पौड़ी में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ध्वस्त हैं और हालात इतने खराब हैं कि रविवार को देहलचौरी में हुई बस दुर्घटना के घायलों को जिला अस्पताल में घायलों को प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाया ऐसे में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को एक मिनिट भी अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है और अगर उनमें जरा सी भी नैतिकता है तो उनको तत्काल अपने मंत्री पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए या मांग आज उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए की। उन्होंने कहा कि पिछले महीनों में यह दूसरी बस दुर्घटना है जिसमें यह देखने को मिला कि जिले के अस्पतालों में ऐसी गंभीर दुर्घटनाओं में घायल मरीजों का कोई प्राथमिक उपचार भी नहीं किया जा सकता , उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा में भी और अब पौड़ी के जिला अस्पताल में भी गंभीर रूप से घायल लोगों के इलाज की कोई सुविधा व इंतजाम नहीं हैं और यही हाल पहाड़ के सभी जिला अस्पतालों का है। श्री धस्माना ने कहा कि रविवार को देहलचौरी में हुए बस हादसे के मरीजों के इलाज के लिए जब अस्पताल में ले जाया गया तो वहां लाइट नहीं थी और जनरेटर खराब था जिसके कारण टॉर्च की सहायता से लोगों को दवा पट्टी करनी पड़ी और अल्ट्रासाउंड एक्सरे व एमआरआई की तो बात दूर की कौड़ी ठहरी। श्री धस्माना ने बताया कि पांच मरीज मौके पर ही मर गए थे व छठा मरीज इलाज के अभाव में रास्ते में मर गया और।बाकी के मरीजों को श्रीनगर बेस अस्पताल रेफर कर दिया गए। श्री धस्माना ने कहा कि जब स्वास्थ्य मंत्री के अपने गृह जनपद के जिला अस्पताल का इतना बुरा हाल है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के अन्य सीमांत जनपदों उत्तरकाशी, चमोली,पिथौरागढ़, अल्मोड़ा चंपावत बागेश्वर जनपदों में स्वास्थ्य सेवाओं का क्या हाल होगा। श्री धस्माना ने कहा कि इन स्थितियों के लिए राज्य की भाजपा सरकार व विशेष रूप से प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत जिम्मेदार हैं और उनको तत्काल अपनी जिम्मेदारी लेते हुए अपने मंत्री पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए।

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