देहरादून। राज्यसभा सदस्य सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि हिंदुस्तान में जो हिंदुत्व की बात करेगा, वह सही मायने में हिंदू कहलाएगा। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर बनना हिंदुओं अधिकार है। इसके लिए अभी न्यायालय के फैसले का इंतजार है।
विराट हिंदुस्तान संगम की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समरसता और स्वच्छता सम्मेलन शनिवार को परमार्थ निकेतन में विधिवत शुरू हो गया। सम्मेलन का डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी और परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने शुभारंभ किया। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से पश्चिमी सभ्यता की ओर तेजी से आकर्षित होती युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पश्चिमी संस्कृति देश में तेजी से पनप रही है, जिससे भारतीय संस्कृति के अस्तित्व के लिए संकट पैदा हो गया है। भारतीय संस्कृति और इतिहास से युवाओं को रूबरू कराने की आवश्यकता है ताकि युवा पश्चिमी संस्कृति के बजाए भारतीय संस्कृति को अपनाएं।
आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि हमें इस देश की विशालता विरासत में मिली है, मगर उस विरासत को सियासत में खो दिया गया है। अब हम सियासत को भूलकर विरासत को संभालें। सबके भीतर एक ही भगवान विराजमान है। लिहाजा द्वेष, विरोध, जातिवाद, परिवारवाद और नक्सलवाद को मिटाते हुए शांतिपूर्ण संवाद की स्थापना हो, यही इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है।
इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, काबीना मंत्री प्रकाश पंत, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, नगर पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा आदि ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, स्वामी हरिचेतनानंद, मौलाना मसूद अहमद अली, राजुल शर्मा, कार्तिक श्रीनिवासन, डा. प्रशांत जैन, अमरीश गर्ग, मोनिका गर्ग, लक्ष्मी गुरुंग, अनीता पंवार, नीरू गौतम, अनुपमा रावत, डा. मेघा शर्मा, नंदनी त्रिपाठी आदि मौजूद थे।