देहरादून (जीकेवी न्यूज)। राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी मंजू बहन ने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा व्यक्तित्व को प्रभावशाली एवं मूल्यनिष्ठ बनाती है। उन्होंने यह भी कहा कि चरित्र के बिना जीवन अधूरा है, और राष्ट्र की प्रगति भी असम्भव है।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवाकेन्द्र सुभाष नगर देहरादून के सभागार में आयोजित, रविवारीय सत्संग में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी मंजू बहन ने कहा कि शक्षा का मौलिक उद्देश्य जीवन में मूल्यों की व्यावहारिक धारणा के साथ-साथ मनुष्य की दैनिक चीजों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विज्ञान और तकनीक का प्रयोग होना चाहिए। सच्ची शिक्षा का उद्देश्य बच्चे को आन्तरिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाना है।
ब्रह्माकुमारी मंजू बहन ने कहा कि आज एक गलत धारणा के साथ हम जीते हैं कि रोटी, कपड़ा और मकान ही जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं हैं। लेकिन यह तो शरीर की मूलभूत आवश्यकताएं हैं। जीवन में सिर्फ रोटी कपड़ा और मकान ही नहीं है; सम्बन्ध, समाज मानवता भी है। अब बताइये कि उन आवश्यकताओं की पूर्ति कौन करेगा ? उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा व्यक्तित्व को प्रभावशाली एवं मूल्यनिष्ठ बनाती है। कर्तव्यनिष्ठ नागरिक तथा समाज एवं राष्ट्र के उत्थान में आध्यात्मिक शिक्षा एक अहम भूमिका अदा करती है। चरित्र के बिना जीवन अधूरा है, और राष्ट्र की प्रगति भी असम्भव है। 
राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी मंजू बहन ने “अच्छी और बुरी यादें” विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अजीब दस्तूर है ज़माने का, अच्छी यादें पेन ड्राइव में और बुरी यादें दिल ड्राइव में रखते हैं। जबकि अच्छी चीज़ तो दिल की ड्राइव में होनी चाहिए, जब चाहें उसे खोल कर यादें ताज़ी कर सकें और सदा खुश रह सकें। जब अच्छी यादें सामने होती है तो मन में खुशी रहती है, उमंग-उत्साह बना रहता है चेहरा खिला हुआ अर्थात हर्षित मुख रहता है। ऐसे व्यक्ति वायुमण्डल में सकारात्मक उर्जा प्रवाहित करते हैं। इस अवसर पर शोभा, विजय बहुगुणा, प्रीति जोशी, प्रभा, राकेश कपूर, सुलक्षणा, विनोद शर्मा, सरोजिनी, उजला, भारत भूषण, विजयलक्ष्मी, कवीता आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।