देहरादून। ज्ञान प्रचारक ऊषा अरोड़ा ने कहा कि परमात्मा को नहीं परमात्मा का रास्ता बताने वाले को ढूंढना ज्यादा जरूरी है। आज परमात्मा को प्राप्त करना आसान है। लेकिन इंसान ने उसे कठिन लक्ष्य बना दिया है।
निरंकारी मिशन के हरिद्वार रोड स्थित सत्संग भवन में ज्ञान प्रचारक ऊषा अरोड़ा ने कहा कि जो जिज्ञासु होते हैं वो परमात्मा को ढूंढने के बजाए परमात्मा के जानकार अवतरित रुप सद्गुरु को ढूंढते हैं। जिनके द्वारा परमात्मा की अनुभूति की जा सकती है। 18 से 20 नवंबर को नई दिल्ली में होने वाले 70वें वार्षिक समागम पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस समागम में इसी तरह भक्त को परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग बताया जाएगा। उन्होंने कहा कि निरंकारी विचारधारा की वास्तविक सम्पत्ति आध्यात्मिक धरोहर है। यह आध्यात्मिक धरोहर किसी ने अर्जित नहीं की, बल्कि सद्गुरु देव के माध्यम से विरासत में उपलब्ध है। संत समागम के वातावरण में ऐसी सुगंध प्रवाहित है कि एक रमणीक दृश्य उपस्थित हो जाता है। चूंकि वहां पर प्रेम- प्यार, भक्ति के तराने गाए जाते हैं। तभी तो भक्ति भरा जीवन जीने के लिए संत सदा प्रेरित करते रहते हैं। संत समागम हम एकता भाईचारे के लिए करते हैं। हमें सत्य प्रभु निरंकार का जो ज्ञान मिला है उसका जीवन में प्रयोग करना जरुरी है। तभी हमारा जीवन सार्थक होगा। सत्संग समापन पर अनेक संतों ने गीत, प्रवचन से संगत को निहाल किया। संचालन शशि बिष्ट ने किया।