देहरादून (गढ़वाल का विकास न्यूज)। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् (भा.वा.अ.शि.प.) देहरादून, देशभर में फैले इसके नौ अनुसंधान संस्थानों तथा पाँच केन्द्रों के माध्यम से पारिस्थितकी को वहन करने के लिए राष्ट्रीय महत्ता के वानिकी अनुसंधान मुद्दों तथा भारतीय वनों एवं रोपणियों की उत्पादकता में संवृद्धि के लिए कार्य करेगा।
नई दिल्ली में प्रकाश जावडे़कर, माननीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री की अध्यक्षता में 15 नवम्बर 2019 को राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं नियोजन प्राधिकरण की प्रबंध निकाय की बैठक में डाॅ. सुरेश गैरोला, महानिदेशक, भा.वा.अ.शि.प. ने विस्तृत योजना ‘‘पारिस्थितिकीय संवहनीयता तथा उत्पादकता संवृद्धि के लिए वानिकी अनुसंधान का सुदृढ़ीकरण‘‘ को प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं नियोजन प्राधिकरण के प्रबंध निकाय ने भा.वा.अ.शि.प. की योजना का 313.67 करोड़ रुपये को पूर्णतः अनुमोदित किया। भारत की प्रमुख वानिकी परिषद् के इतिहास में यह एक ऐतिहासिक क्षण है कि इसके सूत्रपात से अब तक इस मुख्य योजना को सरकार द्वारा वानिकी अनुसंधान एवं विस्तार हेतु अनुमोदित किया गया है।
राष्ट्रीय महत्व की अनुसंधान समस्याओं के सम्बोधन के लिए वानिकी अनुसंधान को अति आवश्यक वित्तपोषण की प्राप्ति होगी जिसका प्रत्यक्ष सम्बन्ध देश के वन आरोग्यता तथा वन आधारित लोगों की आजीविका एवं कृषि पर होगा। इस योजना के माध्यम से, भा.वा.अ.शि.प. तथा इसके संस्थान 31 मुख्य अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य करेंगे जिससे आरोग्यता व उत्पादकता में सुधार होगा तथा वनों एवं रोपणियों के निम्नीकरण की पुनप्र्राप्ति होगी। महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के कृन्तकों एवं किस्मों का विकास किया जाएगा तथा कृषकों एवं राज्य वन विभागों को रोपित करने के लिए प्रदान किया जाएगा। वृक्ष चारा, ईंधन-काष्ठ, अकाष्ठ वन उत्पाद, वन्य फलों, मृदा नमी, जैवविविधता, संरक्षण एवं व्याधियों के महत्वपूर्ण विषय-क्षेत्रों का भी निवारण किया जाएगा।
वन आनुवंशिक संसाधन (एफ.जी.आर.) संरक्षण महत्ता का एक अन्य क्षेत्र है जिस पर राष्ट्रीय स्तर संतति व भविष्य के वंशों के जीन भण्डार के संरक्षण के लिए कार्य किया जाएगा।
‘‘राज्य रेड्ड ़ कार्य योजना‘‘ को तैयार करने के लिए राज्य वन विभागों का क्षमता निर्माण इस योजना का तीसरा घटक है।
कृषि नीति की तर्ज पर वन नीति अनुसंधान सरकार को विभिन्न नीतियों की संकल्पना तथा वर्तमान वन नीतियों के प्रभावों के अध्ययन में आवश्यक नीति निर्देशन प्रदान करेगा। इस पहलु को योजना के चतुर्थ घटक द्वारा विवेचना की जाएगी।
वानिकी अनुसंधान में प्रौद्योगिकीयों के लिए पहुँच (आउटरीच) कार्यक्रम सबसे कमजोर कड़ी रहा है। इसका सुदृढ़ीकरण इस योजना ‘‘भा.वा.अ.शि.प. की वानिकी विस्तार योजना‘‘ के माध्यम से होगा। हितधारकों तक पहुँचना ही इस घटक की मुख्य विषय-वस्तु है।
नवीन क्षेत्रों में वैज्ञानिक क्षमताओं की संवृद्धि के लिए मानव संसाधन विकास को इस योजना के माध्यम से संबोधित किया जाएगा।
भा.वा.अ.शि.प. संस्थान पहले से ही देश की 13 मुख्य नदियों की जीर्णोद्वार योजना के निर्माण पर कार्य कर रहे हंै। नई दिल्ली में 15 नवम्बर 2019 को अनुमोदित नई योजना राष्ट्रीय महत्ता के मुद्दों के सम्बोधन के लिए भा.वा.अ.शि.प. की संवृद्ध क्षमता में और अधिक विस्तृत रूप से जुड़ती है।