परमार्थ निकेतन पहुंचा उत्तराखण्ड अकादमी एंड एडमिनिस्ट्रेशन, नैनीताल से भावी प्रशासनिक अधिकारियों का दल
ऋषिकेश/देहरादून (गढ़वाल का विकास न्यूज)। उत्तराखण्ड अकादमी एंड एडमिनिस्ट्रेशन, नैनीताल में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय प्रशासनिक अधिकारियों का दल परमार्थ निकेतन पहुंचा। भावी प्रशासनिक अधिकारियों के दल ने परमार्थ निकेेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट का आशीर्वाद लिया। स्वामी जी ने उन्हंे देश सेवा, भारतीय जीवन मूल्यों और अपने मूल से जुड़े रहने का संदेश दिया। अध्यात्म के विषय पर उद्बोधन देते हुये कहा की अध्यात्म बटोरने का नहीं बांटने का संदेश देता है। आप सभी अपने-अपने स्तर पर मानवता की सेवा के लिये हमेशा तत्पर रहे।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने युवा प्रशासनिक अधिकारियों का गंगा तट पर अभिनन्दन करते हुये कहा कि इन युवाओं में देश के लिये कुछ करने की; देश के लिये मर मिटने की ऊर्जा है; शक्ति है इसलिये यह देश बदलेगा। लोग कहते है दिन बदलेगा परन्तु मैं कहता हूँ देश बदलेगा। भारत का सौभाग्य है कि उसे श्री नरेन्द्र मोदी जी जैसे प्रधानमंत्री मिले है। उनका उद्देश्य है कि मेरे लिये नहीं बल्कि मेरे द्वारा क्या-क्या हो सकता है; मैं कैसे अपने जीवन को देश सेवा के लिये समर्पित कर सकता हूँ। उन्होने कहा कि हमारा एक अच्छा कर्म किसी का जीवन बदलता है; किसी का दिन बदलता है और हमारा ही एक बुरा कर्म चाहे हम उसे छुप कर ही क्यों न करें वह कभी भी न तो स्वयं से छुपता है न परमात्मा से छुपता है। जब भी हम कोई कार्य करें अपने काॅन्शस (सचेत) को जिंदा रखें। इस देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में न तो जल की कमी नहीं है न ही भोजन की कमी है न ही धरती की कमी है यदि कमी है तो केवल सचेत रहने की अतः हमें जागृत होकर इन सब के लिये मिलकर कार्य करना है।
इस अवसर पर स्वामी जी ने भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को याद करते हुये कहा कि ’’छोटे दिल से कोई बड़ा नहीं होता है, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता है।’’ दिल, छोटा होता है तो सब कुछ छोटा हो जाता है और मन टूट जाता है तो सब बिखर जाता है। इससे कोई दूसरा छोटा नहीं होता हम छोटे हो जाते हैं इसलिये अध्यात्म कहता है अपनी जड़ो से जुड़ें रहो। स्वामी जी ने कहा कि हमें अपना मूल और अपने मूल्य हमेशा याद रखने चाहियें। हमारे समाज में त्याग और सेवा को अर्थपूर्ण जीवन का आधार स्तंभ माना गया है ’’तेन त्यक्तेन भुञजीथा’’ (त्यागपूर्वक जीवन का उपभोग करे)। साथ ही स्वामी जी ने कहा कि किसी भी तंत्र की सुदृढ़ता के लिये आवश्यक है कि हम सभी अपने-अपने कर्तव्यों का निर्वहन सुचारू रूप से करें।
भावी प्रशासनिक अधिकारियों के दल ने परमार्थ गंगा तट पर होने वाली विश्व विख्यात गंगा आरती में सहभाग किया तथा स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के सान्निध्य में विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया।
युवा प्रशासनिक अधिकारी, स्वामी जी के संदेशों से अत्यंत प्रभावित हुये और कहा कि आज हमारी ट्रेनिंग का आखरी दिन था जिसे हम यादगार दिवस के रूप में याद रखेंगे। उन्होने कहा कि स्वामी जी का सेवा के माध्यम से जीवन को अर्थपूर्ण बनाने का संदेश हमें हमेशा अपने कर्तव्यों का बोध कराते रहेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों का यह दल संयुक्त निदेशक श्री नवनीत पाण्डे जी के निर्देशन में परमार्थ निकेतन आया हुआ है जिसमें विवेक सिंह, जितेन्द्र वर्मा, सुमित पाण्डे, अभिषेक, अंकित कण्डारी, दीपक गोस्वामी, सुमिता, एकता, हेम दीक्षित, विदुषी भट्ट, अनुराग, कुमकुम जोशी, ओशिन जोशी, आशुतोष कुमार, नितिन कुमार और अन्य अधिकारियों उपस्थित थे।