इतने सालों से मुसलमानों ने अपना रखा है योग

नमाज में कई बार वज्रासन करते है मुसलमान: नदीम
देहरादून/काशीपुर। प्रत्येक धर्म ने योग को किसी न किसी रूप में अपना रखा है। मुसलमानों ने भी 1400 साल से अधिक समय से अपने जीवन में योग अपना रखा है। मुसलमानों के लिये पांच समय की नमाज पढ़ना अनिवार्य है। इसमें मुसलमान प्रतिदिन 23 बार वज्रासन करते है। इसके अतिरिक्त नमाज में मुसलमानों द्वारा विभिन्न आसन तथा रोजाना योग मुद्रायें भी की जाती है।
यह जानकारी माकाक्स संस्था के केन्द्रीय अध्यक्ष एडवोकेट नदीम उद्दीन ने यहां जारी एक बयान में दी। नमाज को इस्लामिक योग बताते हुये इसके फायदें पर श्री उद्दीन द्वारा ”सेहत और खुशहाली की कंुजी नमाज और जकात” नामक पुस्तक भी लिखी है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि नमाज को इस्लामिक योग भी कहा जा सकता है। एड. उद्दीन ने कहा कियोगासन से जो फायदें प्राप्त किये जाते है वह भी सभी नमाज से भी प्राप्त किये जाते है। इस पुस्तक में नमाज की हर स्थििति के फायदों के साथ-साथ दुनिया से गरीबी दूर करने का रास्ता जकात के बारे में भी जानकारी दी गयी है।
श्री नदीम ने बताया कि नमाज में बैठने की स्थिति बिल्कुल वज्रासन जैसी है और दिन भर की पांच अनिवार्य नमाजों में कुल 23 बार इस स्थििति में बैठना होता है। इस प्रकार नमाज पढ़ने वाला मुसलमान दिन भर में 23 बार वज्रासन करता है। यह सभी जानते है कि वज्रासन ही एक ऐसा आसान है जिसके लिये खाली पेट होना आवश्यक नहीं है। इसके अतिरिक्त नमाज में भू नमन वज्रासन, दक्षासन, हस्तपादासन तथा सूर्य नमस्कार सहित विभिन्न योगासनांे की भी स्थिितियां की जाती है। नमाज के बाद तस्बीह में अंगूठे से अंगुलियों को मिलाकर ध्यान मुद्रा, पृथ्वी मुद्रा, वरूण मुद्रा, ज्ञान मुद्रा तथा आकाश मुद्रा सहित विभिन्न योग मुद्रायें भी स्वतः हो जाती है।
श्री नदीम ने कहा कि प्रत्येक धर्म ने योग को किसी न किसी रूप में अपना रखा है इसलिये योग को किसी एक धर्म विशेष से नहीं जोड़ा जाना चाहिये और इसे साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ाने के लिये प्रयोग किया जाना चाहिये। योग के फायदें उठाने मे किसी को भी कोई संकोच नहीं होना चाहिये।

 

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