निदेशक भी कर्ज लेने व नियम विरू़द्ध नियुक्ति कराने में नहीं रहे पीछे
देहरादून। उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह ने मंत्री पुत्र व पुत्रवधु पर नियम विरूद्ध एक करोड़ रूपये का कर्ज लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने सहकारिता मंत्री को इन मामलों की जांच कराने की चुनौती दी है।
उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष प्रमोद सिंह ने खुलासा किया कि मौजूदा भाजपा सरकार और पिछली कांग्रेस सरकार में भी कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के पुत्र संजीव आर्य और पुत्रवधू ने सहकारी बैंक से नियम विरुद्ध एक करोड़ (अलग-अलग 50-50 लाख) रुपये का कर्ज ले लिया। वह भी तब जबकि संजीव आर्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष थे और नियम के मुताबिक वह या उनके रिश्तेदार सहकारी बैंक से ऋण नहीं ले सकते थे। यही नहीं सहकारी बैंक के निदेशक नवीन पंत तक ने सार्वजनिक सड़कों को गिरवी रख कर शराब कारोबार के लिए 15-16 करोड़ Rs का कर्ज ले लिया जबकि निदेशक भी ऋण नहीं ले सकते।
उन्होंने कहा कि इस मामले में भारतीय रिजर्व बैंक की आपत्ति पर तत्कालीन सहकारिता सचिव ने जांच भी बिठाई, मगर उसे भी दबा दिया गया है। सहकारी बैंकों में यही नहीं हुआ है बल्कि बैंक निदेशकों ने अपने रिश्तेदारों को भी बैंकों में गलत तरीके से नियम विरुद्ध नियुक्तियां दी हैं। उन्होंने कहा कि नैनाताल की सहकारी बैंक निदेशक किरन नेगी पत्नी राजेंद्र नेगी ने अपने पुत्र अमित नेगी को सहकारी बैंक में नौकरी पर लगा दिया। उत्तरकाशी के निदेशक बरफी भक्ति के दामाद प्रवीण कुमार व बेटे जितेंद्र भक्ति को भी सहकारी बैंक में नियुक्ति दी। यही नहीं सहकारिता के प्रबंध निदेशक दीपक कुमार पर अनियमिताओं और गलत तरीके से विदेश यात्रा की कई जांचे चल रही है लेकिन वह सहकारिता राज्य मंत्री धन सिंह रावत के आंख के तारे बने हुए हैं।
उन्होंने धन सिंह रावत पर सहकारिता सम्मेलन के नाम पर बैंकों से पांच-पांच लाख व समितियों से 50-50 हजार रुपये वसूलने को भ्रष्टाचार का स्वरूप बताया और कहा कि इसकी भी जांच होनी चाहिए कि इन सम्मेलनों में मिले धन का कैसे उपयोग हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार सहकारी संस्थाओं पर घपलों घोटालों की जांचें बिठा रही है और उनको फर्जी बताकर उन्हें भंग कर रही है लेकिन सहकारी बैंकों में हुई अनियमितताओं से आंखें मूंदे हुए है।