देहरादून। राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी मंजू बहन ने कहा कि आज जिस तरह से भोग की आवश्यकता ने फैशन का रूप लिया है, उससे समाज अंदर से खोखला होता जा रहा है। इस दौरान उन्होंने जीवन मूल्यों को जीवन का आधार करार दिया।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवाकेन्द्र सुभाष नगर देहरादून के सभागार में आयोजित, रविवारीय सत्संग में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी मंजू बहन ने ”जीवन -मूल्य“ विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि साधारण भाषा में जब ”मूल्य“ शब्द बोला जाता है तो हमारा ध्यान ”दाम या कीमत“ पर ही जाता है, लेकिन सच तो यह है कि ”जीवन-मूल्य“ भी मानवीय जीवन को कीमती बनाने की क्षमता रखते हैं। मूल्य शाश्वत व्यवहार है। उन्होंने कहा कि मूल्यों का निर्माण मानव के साथ-साथ हुआ, इनका अन्त होगा तो सभ्यता के साथ-साथ मानवता भी समाप्त हो जायेगी। यदि कोई व्यक्ति जीवन-मूल्यों की सत्ता को खो देता है तो भौतिक प्रगति के शिखर पर पहुँच कर भी दयनीय हो जाता है।
राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी मंजू बहन ने कहा कि उपभोक्ता संस्कृति के विकास ने मनुष्य के आचार-विचार, जीवन-आदर्श और लक्ष्य को पूरी तरह बदलते हुए उसे अर्थप्रधान, भौतिक और आत्म-केन्द्रित बनाया है। भोग की आवश्यकता एक प्रकार का फैशन बन गयी है। इससे समाज अंदर ही अंदर खोखला होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले एक रोटी को बाँटकर सब खा सकते थे परन्तु आज ”कमाये कोई और खाये कोई“ यह सिद्धान्त मान्य नहीं है क्योंकि प्रेम, विश्वास आदि ”जीवन-मूल्यों“ को उपेक्षित किया जा रहा है, परिणाम स्वरूप निकटतम सम्बन्धों में अविश्वसनीयता घर कर गई। आज मनुष्य भौतिक सुखों की अन्धी दौड़ में सारे जीवन-मूल्यों को कुचल कर आगे बढ़ना चाहता है इसीलिए इस युग को विद्वानों ने मूल्य-संकट का काल कहा है। राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी मंजू बहन ने कहा कि मूल्य कभी बदलते या नष्ट नहीं होते लेकिन उन में विकास या सुधार जरूर हो सकता है। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, न्याय, समता, मानवता आदि मूल्य हर युग में जिन्दा रहेंगे परन्तु इनका प्रभाव कम-अधिक हो सकता है। जीवन-मूल्य जीवन का आधार हैं। इन मूल्यों का जितना अधिक समावेश होगा जीवन उतना ही समृद्ध, सफल और सुखमय होगा। समस्त मूल्यों का स्त्रोत परमात्मा है उनसे संबंध जोड़े। जो भी संस्कार या आदतें मिटानी हैं उन्हें पिता परमात्मा को समर्पित कर दें फिर उन्हें ग्रहण न करने का दढ़ संकल्प करंे। इस अवसर पर पदमा, विजय, प्रीति जोशी, उपदेश, राकेश कपूर, धीरज, विनोद शर्मा, सरोजिनी, उजला, भारत भूषण, विजयलक्ष्मी, कवीता आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।