देहरादून। केंद्रीय संस्कृति, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. महेश शर्मा ने डाक्टरों व मरीजों के बीच रिश्तों की कमजोर होती कड़ी पर अफसोस जताया है। कहा कि इस बात पर आत्म चिंतन व मंथन करने की जरूरत है कि मौजूदा दौर में आखिर इस तरह की परिस्थितियां क्यों बनी हैं। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि याद रखिये जो सम्मान एक चिकित्सक को मिलता है वह एक कारपोरेट हेड के रूप में नहीं मिलेगा।
केंद्रीय राज्य मंत्री डा. शर्मा ने यह बात रविवार को देहरादून में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कही। राजपुर रोड स्थित होटल में आईएमए के 60वें वार्षिक सिंपोजियम का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करने के बाद डा. शर्मा ने एसोसिएशन से जुड़े डाक्टरों को मंत्री के रूप में नहीं बल्कि एक चिकित्सक के रूप में संबोधित किया। आये दिन डाक्टरों व मरीजों के बीच रिश्तों में जो कड़वाहट होने की बातें सामने आती हैं उस पर उन्होंने नाराजगी जताई। कहा कि चिकित्सकों को इस बारे में मंथन करना होगा। एमसीआई की जगह नेशनल मेडिकल कमीशन गठित करने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की चिंताओं को जायज बताते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कोई भी कदम एक पक्षीय नहीं उठाती। तमाम पहलुओं पर मंथन करने के बाद इस बिल को संसद की स्टैंडिंग कमेटी को भेजा गया है।
नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसी भी तरह के सुझावों को आत्मसात करने में कभी पीछे नहीं हटी है। जहां तक क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने का प्रश्न है राज्य सरकारें अपने स्तर पर इससे जुड़े मसलों को सुलझाने का प्रयास कर रही हैं।उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्य सेवाओं की स्थिति बेहतर नहीं है। अन्य राज्यों में भी स्वास्य सेवाओं का हाल कमोबेश ऐसा ही है। यहां तक कि देश के बड़े मेट्रो शहरों में भी सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। कई जगह अस्पतालों में पैरा मेडिकल स्टाफ ही नहीं है। कहा कि देश में वर्तमान में 490 के करीब सरकारी व निजी मेडिकल कालेज हैं। यदि इन मेडिकल कालेजों की संख्या दोगुनी भी कर दी जाए तो डाक्टरों की जो कमी मौजूदा समय में है उसको दूर करने में दो दशक का समय लग जायेगा।
इससे पहले अपर सचिव स्वास्य युगल किशोर पंत व स्वास्य महानिदेशक डा. अर्चना श्रीवास्तव ने केंद्रीय राज्यमंत्री का स्वागत किया। स्वास्य महानिदेशक डा. अर्चना ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्य सुविधाओं में सुधार के लिए निजी सहभागिता की जा रही है। कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को भी इस मुहिम में सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन दून शाखा की अध्यक्ष डा. गीता खन्ना ने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट की चुनौतियों पर अपनी बात रखी। उम्मीद जताई कि राज्य सरकार एक्ट में संशोधन करने के बाद ही इसका क्रियान्वयन करेगी। 50 बेड से कम के अस्पतालों/नर्सिग होम को एक्ट से मुक्त रखने की मांग भी उन्होंने की। भाजपा नेता उमेश अग्रवाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. वाईएस थपलियाल, दून मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. प्रदीप भारती, डा. एलसी पुनेठा, एसोसिएशन के सचिव डा. ललित वाष्ण्रेय, डा. आलोक आहूजा, डा. पीके अग्रवाल, डा. विजय समेत तमाम चिकित्सक इस अवसर पर मौजूद रहे।
द सहारा न्यूज ब्यूरो