किसानों को फसल का मिलेगा सही दाम, मिट्टी की गुणवत्ता के अनुकूल फसलें उगाएंगे किसान, जैविक उत्पादों को बाज़ार उपलब्ध कराएगा श्री गुरु राम राय विवि
देहरादून (गढ़वाल का विकास न्यूज)। जैविक उत्पादों को बाजार उपलब्ध करवाने व पहाड़ के किसानों को उनकी फसल के मुफीद दाम दिलवाने के लिए श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय ने बड़ी पहल की है। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय पहाड़ी क्षेत्रों में जैविक खेती के उत्पादों को किसानों के साथ मिलकर तय दर पर खरीदेगा। इस पहल के चलते वहां के किसानों को उत्पादित फसल को बेचने की चिंता नहीं रहेगी। इसके अलवा विश्वविद्यालय का कृषि विभाग गांवों की मिट्टी व जलवायु का परीक्षण कर किसानों को सही वस्तुस्थिति से अवगत कराएगा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उनके गांव की मिट्टी किन फसलों की पैदावार के लिए उपयुक्त है। पहले चरण में पौडी के तिमली गांव व आसपास के क्षेत्रों में जैविक खेती से हो रहे उत्पादों को खरीदने का काम शुरू किया जा रहा है।
तिमली गांव पौडी निवासी आशीष डबराल ने अपने गांव व आसपास के क्षेत्रों में जैविक खेती का खूबसूरत माॅडल तैयार किया है। आशीष गुडगांव में कार्यरत हैं व हर हफ्ते गुड़गांव से अपने गांव आते हैं। मंगलवार सुबह आशीष डबराल ने श्री दरबार साहिब देहरादून के श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज से भेंट की। उन्होंने श्री महाराज जी से मांग की कि तिमली गांव व आसपास के क्षेत्रों में जैविक खेती की अपार सम्भावनाएं हैं। वहां के बेरोजगार युवाओं व ग्रामीणों को साथ लेकर जैविक खेती का कार्य कर रहे हैं। अभी यह कार्य सीमित पैमाने पर किया जा रहा है। यदि श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय इस कार्य में सहयोग करे तो तिमली गांव सहित आसपास के बहुत बड़े भू-भाग पर जैविक खेती का शानदार माॅडल तैयार कर सकता है। इस पहल को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखण्ड के अन्य जिलों के किसानों को भी इस मुहिम से जोड़ा जा सकता है। ग्रामीणों से उन्हें खेती कार्य में अच्छा सहयोग मिल रहा है। वर्तमान में 200 नाली भूमि पर कुलथ, मटर, गोभी, आलू, आरू, लहसून आदि की खेती की जा रही है। इस क्षेत्र में पानी की समुचित व्यवस्था की है। कई बार उनके सामने जैविक खेती से तैयार फसल को बेचने व किसानों को फसल का सही दाम दिलवाने में परेशानी आ जाती है।
श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने कहा कि तिमली गांव व आसपास की जैविक खेती से तैयार फसलों को श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय खरीदेगा। इसके साथ ही श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के कृषि वैज्ञानिक व शोधार्थी तिमली गांव जाएंगे। उस क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु का परीक्षण कर वहां के किसानों को प्रात्साहित करेंगे कि कौन सी फसलें वहां की मिट्टी और जलवायु के अनुकूल हैं। ऐसी फसलों, फलों व फूलों की खेती से किसानों को फसलों पैदावार बढ़ेगी व उन्हें फसलों की अच्छी कीमत मिलेगी। पहले चरण में पौड़ी जिले के तिमली गांव व आसपास के क्षेत्रों पर काम किया जाएगा, उसके बाद अन्य जिलों के किसानों को भी इस कड़ी से जोड़ा जाएगा। उन्होंने दोहराया कि पहाड़ी क्षेत्रों के किसान जैविक खेती के उत्पादों को तैयार करें उन्हें गांवों से देहरादून लाने व बेचने की जिम्मेदारी एसजीआरआर विश्वविद्यालय निभाएगा। कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में एसजीआरआर विश्वविद्यालय किसानों को साथ लेकर जैविक खेती के सुअवसर उपलब्ध करवाएगा। विश्वविद्यालय फसलों को निर्धारित दरों पर खरीदेगा इससे किसानों के सामने फसलों को बेचने की समस्या नहीं रहेगी व स्थानीय युवाओं को भी खेती से जुड़ने का प्रोत्साहन मिलेगा।