बसपा सुप्रीमो ने उत्तराखंड समेत कई राज्यों के बदले प्रभारी

दिल्ली व मध्य प्रदेश के अध्यक्षों को भी बदला, लोकसभा चुनाव में खराब परिणाम से थी नाराज
नई दिल्ली (गढ़वाल का विकास न्यूज)। लोकसभा चुनाव में अपेक्षानुरूप परिणाम न मिलने से नाराज बसपा सुप्रीमो मायावती की गाज पार्टी पदाधिकारियों पर गिरी है। खराब प्रदर्शन पर बसपा सुप्रीमों द्वारा उत्तराखंड समेत करीब आधा दर्जन राज्यों के प्रभारियों के अलावा दिल्ली व मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्षों को भी हटा दिया गया।
लोकसभा चुनाव में बसपा को अनुमान से बहुत कम सीटें मिली हैं. बताया जा रहा है कि इसके चलते मायावती काफी नाराज हैं. उन्होंने शनिवार को दिल्ली में ही राज्य प्रभारियों व प्रदेश अध्यक्षों के साथ बैठक बुलाई थी। इसमें राज्यवार लोकसभा चुनाव की स्थितियों की चर्चा की। समीक्षा के दौरान खराब प्रदर्शन पर मायावती ने कई राज्यों के प्रभारियों को हटा दिया है. जिनमें उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, उड़ीसा शामिल हैं. इसके साथ ही दिल्ली और मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्षों को भी हटाया गया है।
बैठक में मायावती ने यूपी बीएसपी प्रदेश अध्यक्ष आर एस कुशवाहा से उत्तराखंड प्रभारी का चार्ज ले लिया गया है उनकी जगह एमएल तोमर को उत्तराखंड राज्य के नया प्रभारी बनाया गया है। इसके साथ ही बसपा सुप्रीमों द्वारा उड़ीसा-गुजरात के प्रभारी पद से छट्ठूराम को हटाकर बिहार-झारखंड का प्रभारी बनाया गया है। मुनकाद अली को राजस्थान प्रभारी पद से हटा दिया गया है। पूर्व सांसद डा. बलिराम को बिहार राज्य के द्वितीय प्रभारी पद से हटाया गया। पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह को झारखंड राज्य प्रभारी पद से हटा दिया गया है। रामअचल राजभर को गुजरात के साथ महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया गया है। उनसे बिहार राज्य का प्रभार वापस ले लिया गया है।
बसपा सुप्रीमों मायावती द्वारा दिल्ली व मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्षों को भी हटाया गया है। दिल्ली में सुरेंद्र सिंह की जगह लक्ष्मण सिंह और मध्य प्रदेश में डीपी चौधरी की जगह रमाकांत पुत्तल को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।
यूपी के जोन इंचार्ज व जिलाध्यक्षों की बैठक सोमवार को
मायावती अब सोमवार को यूपी के जोन इंचार्ज व जिलाध्यक्षों के साथ लोकसभा प्रत्याशियों व नवनिवार्चित सांसदों के साथ बैठक करेंगी। बैठक में शामिल होने के लिए सभी को निर्देश भेज दिया गया है। बसपा ने लोकसभा चुनाव 2014 की अपेक्षा 2019 में भले ही बेहतर प्रदर्शन करते हुए 10 सीटें जीती हैं, लेकिन अपेक्षा के मुताबिक गठबंधन को कम सीटें मिली हैं। इसलिए बैठक में संगठन में फेरबदल को लेकर महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है।

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