राज्य विधि आयोग की बैठक में इन मुद्दो पर हुई चर्चा

देहरादून। विधान सभा सभा कक्ष में न्यायमूर्ति(से0नि0)राजेश टंडन, अध्यक्ष, राज्य विधि आयोग की अध्यक्षता में संपन्न हुई। उक्त बैठक में उत्तराखण्ड के सन्दर्भ में व्यवहारिक कानून निर्माण के लिए राज्य सरकार की अपेक्षा के अनुरूप महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा की गई।
बैठक में कहा गया कि ऐसे कानूनों की पहचान करना, जिनकी दीर्घ अवधि तक राज्य को आवश्यकता, उपयोगिता नहीं है अथवा ऐसे कानूनों को चिन्हित करना, जिसमें तत्काल राज्य हित में संशोधन किया जाना आवश्यक है, इसके सम्बन्ध में सरकार को अपनी संस्तुति उपलब्ध कराया जायेगा। राज्य विधि आयोग का यह प्रयास है कि राज्य में लागू विधियों जो अनुपयोगी हो गयी है उनके संदर्भ में राज्य सरकार को अपनी संस्तुति भेजेगा।
बैठक में निम्न महत्वपूर्ण बिन्दूओं पर चर्चा की गई।
1. पर्वतीय राज्य को ध्यान में रखते हुए नए कानून तैयार करना।
2. किशोर अपराध अधिनियम की चर्चा की गई। अतः किशोर अपराध को सामने रखकर व्यावहारिक कानून बनाने पर विचार करना।
3. आर्थिक दृष्टि से पर्वतीय राज्य पर सुझाव लेकर कानून बनाने पर विचार करना।
4. नागरिकों के हित की सुरक्षा के सम्बंध में अभी कुछ दिन पहले कैबिनेट की मीटिंग मंे 13 नए पर्यटन स्थल घोषित किये गये हैं। इन पर्यटक स्थानों में इनका कानून बनाकर शौचालय की व्यवस्था और अन्य सुविधायें देने और पर्यटन के लिए उद्योग की व्यवस्था कराना। इस सम्बन्ध में व्यावहारिक कानून बनाना।
5. अखबार की प्रति से केदारनाथ मार्ग पर जो यातायात में असुविधा रही है उस पर कानून बनाकर चारों धामों में मोबाइल एवं चिकित्सा की व्यवस्था करना।
6. गरीब नागरिकों के लिए लीगल सर्विसेस की उपलब्ध्यिां लीगल अथाॅरिटी द्वारा उपलब्ध करना। इस सम्बन्ध में व्यवहारिक कानून बनाना।
उपरोक्त बिन्दूओं पर उत्तराखण्ड के सन्दर्भ में व्यवहारिक कानून  निर्माण के सम्बन्ध में सुझाव दिये गये हैं।
उपरोक्त बिंदु के संबंध में बैठक में उपस्थित विभागीय अधिकारियों द्वारा अपने सुझाव आयोग को दिये गये। सुझाव को लेकर चार धाम यात्रा के दौरान पर्याप्त मोबाइल चिकित्सा सुविधा, यात्रियों की सुविधा एवं जीवन रक्षा हेतु यात्रा पूर्व स्वास्थ्य जांच अथवा स्वास्थ्य प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने, यात्रा के दौरान पार्किंग व्यवस्था, यात्रा में प्रयुक्त घोड़े एवं खच्चरों हेतु अलग मार्ग बनाये जाने, जिससे यात्रियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े साथ ही विधिक प्राधिकरण द्वारा उत्तराखण्ड में कानूनों से संबंधित व्यवस्था एवं किशोर अपराध अधिनियम के संबंध में व्यावहारिक कानून की विस्तृत रिर्पोट तैयार कर राज्य सरकार को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में आर0 पी0 पंत, विशेष कार्यधिकारी, अब्दुल कय्यूम सिविल जज/सचिव उत्तराखण्ड विधिक प्राधिकरण, मोहित चैधरी जिला कार्यक्रम अधिकारी, डा0 एन0के0 पन्त संयुक्त सचिव विधि आलेखन, श्रीमती उशा नेगी अध्यक्ष बाल संरक्षण आयोग, श्रीमती मीना बिष्ट जिला प्रोबेशन अधिकारी, बाल संरक्षण आयोग विपिन कुमार, समीक्षा अधिकारी, एस0एस0 सामन्त, वरिष्ठ शोध अधिकारी इत्यादि मौजूद थे।

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