देहरादून/हरिद्वार। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच आम जनमानस की सुविधा को लेकर तमाम तरह के दावे क्यों न किये जा रहे हो, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही हैं। ऐसा ही एक मामला जनपद हरिद्वार से सामने आया हैं, जिसने सरकारी दावों की पोल खोलकर सामने रख दी हैं।
जानकारी के मुताबिक जनपद हरिद्वार में वेंटिलेंटर बेड होने के दावों के बीच CM तीरथ सिंह रावत ने बाबा रामदेव सहित तमाम प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में कोविड अस्पताल का शुभारंभ किया गया, उसी अस्पताल प्रबंधन ने सीएम के जाते ही 66 साल की बुजुर्ग महिला रेखा शर्मा निवासी सर्वप्रिय विहार कनखल को वेंटिलेटर बेड देने से मना कर दिया, जबकि सुबह अस्पताल में भर्ती करने के दौरान बुजुर्ग महिला के बेटे को डॉक्टरों ने कहा था कि आपकी मां को वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया जाएगा। फिलहाल आप यहां से चले जाहिए क्योंकि यहां अधिकारी दौरा करने वाले हैं। 
बताया जाता हैं कि शाम को जब मरीज का बेटा अनुज शर्मा वहां पहुंचा तो अस्पताल के चिकित्सको ने वेंटिलेटर न होने की बात कहते हुए मरीज के बेटे के हाथ में रेफर लेटर थमा दिया और इनको कहीं दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कहीं। मरीज के बेटे अनुज शर्मा ने बताया कि उनके लाख गिडगिडाने के बाद भी उनकी नहीं सुनी गई और उन्हें जबरदस्ती रैफर लेटर थमा दिया गया, जबकि यहां वेंटिलेंटर होने का दावा किया जा रहा है।
अनुज शर्मा ने यह भी बताया कि योग गुरु बाबा रामदेव से भी उन्होंने गुहार लगाई लेकिन बाबा रामदेव ने ये कहा कि वेंटिलेटर तो है लेकिन व्यवस्था अभी नहीं हो पा रही है। फिर भी मैं दिखवाता हूं। उन्होंने कहा कि आम आदमी के साथ धोखा हो रहा है। बेस अस्पताल जो कि अब डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर के तौर पर बनाया गया है के नोडल अधिकारीअधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि वेंटिलेटर तो मौजूद हैं लेकिन महिला को क्यों नहीं दिया गया, इसकी जानकारी जुटाई जा रही हैं।