सुबोध उनियाल पहले अपने विभाग और उत्तराखंड की बदहाली देखें, फिर राहुल गांधी पर सवाल उठाएं : गरिमा मेहरा दसौनी

देहरादून, गढ़वाल का विकास डॉट कॉम। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि सुबोध उनियाल जी पहले यह बताएं कि वे किस नैतिक अधिकार और किस उपलब्धि के आधार पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से सवाल पूछ रहे हैं?

राहुल गांधी देश के नेता प्रतिपक्ष हैं और देश के युवाओं, छात्रों और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल उठाना उनका संवैधानिक और राजनीतिक दायित्व है। इसलिए सुबोध उनियाल को राहुल गांधी की चिंता करने के बजाय अपने विभाग और अपने राज्य की चिंता करनी चाहिए।

झारखंड के छात्र आंदोलन पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाने से पहले सुबोध उनियाल को तथ्य देख लेने चाहिए। झारखंड सरकार ने छात्रों से कई दौर की बातचीत की है और उनकी अनेक मांगों पर कार्रवाई की है। तीन JPSC परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति बनी है, JPSC के शीर्ष स्तर पर इस्तीफे हुए हैं, कथित अनियमितताओं की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी है तथा भर्ती व्यवस्था में सुधार और फास्ट-ट्रैक न्यायिक प्रक्रिया जैसे कदमों की बात सरकार ने स्वीकार की है। इसके बावजूद छात्रों पर 10 अगस्त को पुलिस बल प्रयोग की घटना हुई, जिस पर राहुल गांधी ने भी सवाल उठाए हैं।

सुबोध उनियाल जी को यह समझना चाहिए कि छात्रों पर लाठी चलाने और फिर विपक्ष से सवाल पूछने से सरकार की जवाबदेही खत्म नहीं हो जाती।

और अगर उन्हें वास्तव में छात्रों की इतनी चिंता है तो मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि उत्तराखंड में पिछले वर्षों में भर्ती परीक्षाओं की अनियमितताओं और पेपर लीक ने हजारों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, तब सरकार को जवाबदेह कौन बनाएगा?

वे अपने स्वास्थ्य विभाग की हालत पर भी नजर डालें। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में आज भी कई दुर्गम क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और मरीजों को सड़क तक पहुंचाने के लिए डंडी-कंडी और स्ट्रेचर का सहारा लेना पड़ता है। यह सिर्फ व्यवस्था की कमी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की गंभीर विफलता का सवाल है।

देहरादून में 16 करोड़ रुपये की लागत से बना नंदा की चौकी का पुल उद्घाटन के महज 16 दिन बाद क्षतिग्रस्त हो गया। 12 जुलाई को पुल जनता के लिए खोला गया था और 28 जुलाई को उसके पहुंच मार्ग का बड़ा हिस्सा धंस गया।

तो सुबोध उनियाल जी बताएं

क्या राहुल गांधी आपके विभाग के मंत्री हैं? क्या राहुल गांधी उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जिम्मेदार हैं? क्या राहुल गांधी ने 16 करोड़ के पुल का निर्माण कराया था?

उनका काम अपनी सरकार की नाकामियों पर पर्दा डालना नहीं, बल्कि अपने विभाग को ठीक करना है।

रोज अस्पतालों में मरीजों और चिकित्सकों के बीच विवाद, चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें, पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और बुनियादी सुविधाओं का अभाव—इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य मंत्री को देना चाहिए।

जिस मंत्री के अपने विभाग में जवाबदेही के इतने सवाल खड़े हों, वह दूसरे राज्य के छात्रों के आंदोलन पर ज्ञान बांटने के बजाय पहले अपने घर की व्यवस्था दुरुस्त करे।

जहां तक नीट का सवाल है, सुबोध उनियाल जी शायद भूल रहे हैं कि नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। छात्रों की आवाज उठाना राहुल गांधी का अपराध नहीं है। छात्रों की आवाज उठाने वाला विपक्ष अराजकता नहीं फैलाता, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करता है।

और सबसे महत्वपूर्ण बात— राहुल गांधी ने झारखंड में छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग की आलोचना की है, झारखंड के छात्रों के सवालों को राजनीतिक रंग नहीं दिया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग गलत है—यह बात लोकतंत्र में सत्ता पक्ष को भी स्वीकार करनी चाहिए।

सुबोध उनियाल जी को सलाह है कि राहुल गांधी की लोकप्रियता, उनकी चिंता और उनके सवालों का जवाब देने के बजाय वे अपने विभाग की फाइलें खोलें।

गरिमा ने पूछा कि उनियाल बताए स्वास्थ्य व्यवस्था कब सुधरेगी?

पहाड़ की महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचने के लिए डंडी-कंडी से कब मुक्ति मिलेगी?

अस्पतालों में सुरक्षा और सम्मानजनक इलाज कब मिलेगा?

और करोड़ों की लागत से बने पुल 16 दिन में क्यों धंस रहे हैं?

गरिमा ने कहा उपरोक्त सवालों का जवाब दीजिए मंत्री जी,राहुल गांधी की चिंता छोड़िए—पहले उत्तराखंड की चिंता कीजिए।

क्योंकि जनता ने आपको उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी दी है, राहुल गांधी पर टीका टिप्पणी की नहीं।

सुबोध उनियाल जी को राहुल गांधी को जवाब देने की जरूरत नहीं है—आपको उत्तराखंड की जनता को जवाब देने की जरूरत है। आप स्वास्थ्य मंत्री हैं, राहुल गांधी नहीं; इसलिए अपने विभाग की सेहत पहले ठीक करिए, राजनीति की सेहत की चिंता बाद में करिए।

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