उत्तराखंड: जानिये, सरकार कितने करोड़ का लेगी कर्ज

देहरादून। ऊर्जा, कृषि, सिंचाई और उद्योगों से संबंधित विकास योजनाओं के लिए धन जुटाने के लिए प्रदेश सरकार जून में बाजार से 300 करोड़ रुपये का कर्ज फिर लेगी। यह कर्ज 10 साल के भीतर यानी 2028 तक चुकाया जाएगा। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी के मुताबिक कर्ज की ब्याज दर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया निविदा के आधार पर तय करेगा। बता दें कि प्रदेश सरकार इस साल 7300 करोड़ तक का कर्ज ले सकती है। 31 मार्च 2017 तक प्रदेश पर 35209.59 करोड़ का कर्ज था जिसमें से 10212.85 करोड़ नेशनल स्माल सेविंग फंड की सिक्योरिटीज के रूप में, 20832.29 करोड़ राज्य विकास ऋण, 3509.13 करोड़ नेशनल बैंक ऑफ एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट के ऋण और शेष भारत सरकार के कर्ज के रूप में है। गौरतलब है कि सूबे की खराब माली हालत के बीच कर्मचारियों के वेतन के बढ़ते दबाव के चलते प्रदेश सरकार जहां उन्हें सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक भत्ते देने की तैयारी में मई में सरकार 300 करोड़ रुपये कर्ज ले चुकी है। प्रदेश सरकार इस वित्तीय वर्ष में 500 करोड़ का कर्ज पहले ही ले चुकी है। अब प्रदेश सरकार अगर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कर्मचारियों को भत्ते देती है तो राज्य पर करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रदेश सरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर पहले से वित्तीय बोझ सहन कर रही है। बीते बुधवार को प्रदेश सरकार ने राज्यकर्मियों का महंगाई भत्ता भी बढ़ा दिया है जिससे सरकार पर 60 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। बहरहाल , सरकार के इस कदम से प्रदेश सरकार पर कर्ज करीब 50 हजार करोड़ रुपये पार कर जाएगा। इस वक्त प्रदेश पर 41721.1152 करोड़ रुपये का कर्ज है जो कि अगले साल 31 मार्च कि 47580.4252 करोड़ पहुंचने की उम्मीद है। गौरतलब है कि प्रदेश के बजट का 31.55 फीसद हिस्सा कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर खर्च होता है जबकि 12.29 फीसद पेंशन व आनुतोषिक पर जाता है। इसके अलावा 10.67 हिस्सा ब्याज व लाभांश पर खर्च होता है और 7.81 फीसद हिस्सा निवेश ऋणों पर खर्च होता है।

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