मासिक परीक्षा के फैसले का किया विरोध
देहरादून। सरकार के मासिक परीक्षा के फैसले का विरोध करने के लिए शिक्षक संगठनों ने आपस में समन्वय बनाकर लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। इसके लिए एक महा संगठन बनाने की तैयारी हो गई है। यह संगठन जहां इस आदेश का विरोध करेगा वही शिक्षकों की मांगों को लेकर भी भविष्य की बड़ी लड़ाइयां इसी के बैनर तले लड़ी जा सकती हैं।
शुक्रवार को रेसकोर्स स्थित पदम सिंह शिक्षक भवन में शिक्षा विभाग से जुड़े तमाम संगठनों के पदाधिकारियों ने यह निर्णय लिया। इस बैठक में उत्तराखंड के सभी अशासकीय शासकीय प्रधानाचार्य परिषद, उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ, राजकीय शिक्षक संघ जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ एवं प्रांतीय शिक्षक प्राथमिक शिक्षक संघ एवं जनपद पदाधिकारी मौजूद थे। बैठक में एक स्वर से मासिक परीक्षाओं का बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया। माह जनवरी में हो चुकी मासिक परीक्षा का मूल्यांकन केंद्र की बजाय स्वकेंद्र पर ही करने का निर्णय लिया गया। महा संगठन के लिए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रत्येक संगठन अपने प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर महा संगठन का प्रस्ताव पारित कर कराए। उसके पश्चात सभी संगठनों से बातचीत करके इसका गठन करने के लिए आगामी बैठक तय की जाएगी। इसमें महा संगठन के गठन का खाका तैयार हो जाएगा। फिलहाल महा संगठन के गठन के लिए एक समिति का गठन कर दिया गया है। जिसमें अशासकीय प्रधानाचार्य वेलफेयर एसोसिएशन, माध्यमिक शिक्षक संघ, राजकीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, राजकीय शिक्षक संगठन, राजकीय प्रधानाचार्य परिषद, अशासकीय प्रधानाचार्य वेलफेयर एसोसिएशन, राजकीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ व राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष और महामंत्री नामित किए गए हैं। यह सब लोग आपस में विचार करके महा संगठन की रूपरेखा बनाएंगे। बैठक में शिक्षक नेता दिग्विजय सिंह चौहान, अवधेश कुमार, प्रिंसिपल एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह बिष्ट, रामबाबू विमल, अनिल कुमार, राजेश सैनी, जीसी सेमवाल, जेसी उनियाल, प्रेम सिंह रावत, कुंवर सिंह राणा, संजय बिजल्वाण, वीरेंद्र सिंह कृषाली, सुभाष चौहान, प्रकाश चंद सुयाल सहित दो दर्जन से अधिक शिक्षक नेता मौजूद थे।