उत्तराखंड : प्राइमरी शिक्षकों में जगी आस

देहरादून। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के आश्वासन के बाद अप्रशिक्षित की श्रेणी में आ चुके प्राइमरी के शिक्षकों को उम्मीद जगी है कि सरकार उनके लिए कोई न कोई रास्ता जरूर निकाल लेगी। संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय से मिलकर आभार भी जताया। यमुना कालोनी स्थित मंत्री आवास पहुंची प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रान्तीय अध्यक्ष निर्मला महर व प्रान्तीय महामंत्री दिग्विजय सिंह ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात की। उन्होंने विशिष्ट बीटीसी डिग्रीधारक शिक्षकों के सम्बन्ध में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से की गई सकारात्मक बातचीत के लिए आभार व्यक्त किया। इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जहां शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, वहीं सभी संवगरे के शिक्षकों की समस्याओं के निदान के लिए गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को समाज में बहुत सम्मान किया जाता है, इसलिए शिक्षकों को चाहिए कि वे शैक्षिक उन्नयन के लिए खूब मेहनत से काम करें।विशिष्ट बीटीसी डिग्रीधारक शिक्षकों के सामने पिछले वर्ष यकायक बड़ी समस्या आ खड़ी हुई थी। केंद्र सरकार की नियमावली के तहत उत्तराखंड के 13 हजार से अधिक शिक्षक भी अप्रशिक्षित की श्रेणी में आ गये थे। राज्य सरकार द्वारा इन्हें विशिष्ट बीटीसी कराने के बाद नौकरी में ले लिया गया था। यही स्थिति उत्तर प्रदेश में भी आयी। ऐसे शिक्षकों को डीएलएड या ब्रिज कोर्स करके प्रशिक्षित करने की व्यवस्था थी, लेकिन शिक्षकों ने इसे अपना अपमान बताते हुए पंजीकरण करने से साफ मना कर दिया। संघ का दबाव देखते हुए शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने केंद्र के सामने राज्य की स्थिति को रखा और केंद्र ने रास्ता निकालने का भरोसा दिया। मगर अब उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस समस्या से निजात पाने के लिए पहल की है। दोनों प्रदेशों के अप्रशिक्षित शिक्षकों को उसी पहल के तहत प्रशिक्षित मान लेने के लिए केंद्र राजी हो गया है।

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