सिख सेवक जत्थे द्वारा 58 वां वार्षिक कथा कीर्तन दरबार
देहरादून (गढ़वाल का विकास न्यूज)। सिख सेवक जत्थे के तत्वाधान में छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब का 424 वां पावन प्रकाश पर पूर्ण श्रद्धा एवं उत्साह पूर्वक कथा कीर्तन के रूप में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में मनाया गया ।
प्रातः नितनेम के पश्चात भाई सतवंत सिंह ने आशा दीवार शब्द, “पंज प्याले पंज पीर” बेबे नानकी सेवक जत्थे के बच्चों ने शब्द, बढ़ी आरजा हरगोविंद की, काका मनप्रीत सिंह ने शब्द, दर्शन देख जीवां गुरु तेरू, भाई चरणजीत सिंह ने शब्द सखी मिलो रस मंगल गावो का गायन कर संगतों को निहाल किया। भाई शमशेर सिंह ने गुरु जी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु हरगोबिंद साहिब का जन्म 1595 मैं गुरु की बढाली पिता गुरु अर्जन देव जी एवं माता गंगा जी के घर हुआ। आप बहुत परोपकारी बड़े योद्धा थे ।आप ने 4 जंगो में विजय प्राप्त की ।भाई सिमरनजीत सिंह, हजूरी रागी दरबार श्री अमृतसर वालों ने शब्द सा धरत भई हरियावली, जित्थे मेरा सतगुरु बैठा आई एवं भाई सुखविंदर सिंह हजूरी रागी दरबार श्री अमृतसर वाले ने शब्द “डिठे सभै थांव, नांही तुध जेहा” का गायन कर संगत को निहाल किया। कार्यक्रम के पश्चात संगतो ने गुरु का लंगर छका । इस अवसर पर गुरुद्वारा सिंह सभा के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राजन , जत्थे के प्रधान गुलजार सिंह, उपाध्यक्ष जगमिंदर सिंह छाबड़ा, राजेंद्र सिंह राजा, मनजीत सिंह, सतनाम सिंह, अरविंद सिंह, रविंदर सिंह राणा, सुरजीत सिंह कोहली, दलजीत सिंह, पी एस कोचर, भाई सुखविंदर सिंह आदि उपस्थित थे। मंच का संचालन महासचिव सेवा सिंह मठारू ने किया।