देहरादून। राज्य में बढती नशाखोरी की समस्या के निराकरण के सम्बन्ध में मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन उत्पल कुमार की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक/गोष्ठी में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये।
मुख्य सचिव द्वारा नशाखोरी की समस्या का निराकरण करने हेतु विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये गये। उन्होंने गृह विभाग को प्रत्येक तीसरे माह नशाखोरी की समस्या से निराकरण के सम्बन्ध में शासन स्तर पर समीक्षा बैठक आयोजित करने, शिक्षा विभाग केा छात्र-छात्राओं को जागरूक किये जाने हेतु पाठ्यक्रम सामग्री में नशे के दुष्परिणामों से सम्बन्धित अध्ययन सामग्री का समावेश करने तथा सकूल/कालेजों में नोडल अधिकारी रखे जाने की व्यवस्था की जाये, जो नशे के दुव्र्यसनों में लिप्त छात्र-छात्रओं पर निगरानी रखें तथा इसके दुष्प्रभावों के सम्बन्ध में छात्र-छात्राओं को जागरूक करने, शिक्षा, सूचना, शहरी विकास एवं गृह विभाग को स्कूल, कालेजों, अन्य शैक्षणिक संस्थानों एवं मलिन बस्तियों(विशेषकर रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैण्ड के आस-पास) ड्रग पैडलरों पर नियंत्रण, निगरानी एवं पर्यवेक्षण हेतु सतर्कता समिति का गठन करने तथा प्रदेश स्तरीय हेल्पलाइन न0 जारी करने, सूचना विभाग को संचार माध्यमों से नशाखोरी के विरूद्ध व्यापक प्रचार-प्रसार करने, शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, गृह विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग को समस्त शैक्षणिक संस्थानों में नियमित अंतराल पर नशाखोरी के विरूद्ध कार्यक्रम आयोजित किये जाने तथा छात्र-छात्राओं के साथ-साथ उनके माता-पिता/संरक्षकों को भी शामिल करने, समाज कल्याण विभाग को राज्य में परिचालित पंजीकृत/अपजींकृत गैर शासकीय संस्थाओं (एनजीओ) का नियमित पर्यवेक्षण करने संस्थाओं के वित्त पोषण की नियमित जांच भी कराई जाय तथा उक्त संस्थाओं में मनोचिकित्सक, परामर्शदाता आदि नियुक्त किये जाने के सम्बन्ध में कार्यवाही करने, चिकित्सा, शिक्षा, समाज कल्याण, आबकारी एवं गृह विभाग को अपने-अपने स्तर से नशाखोरी के विरूद्ध एक-एक नोडल अधिकारी नामित करते हुए एक संयुक्त टीम का गठन करने तथा टीम द्वारा प्रत्येक तीन माह पर अपनी संयुक्त रिपोर्ट मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन को प्रस्तुत करने तथा गढवाल एवं कुमायूं मण्डल के लिए एक-एक सरकारी सहायता प्राप्त आदर्श नशामुक्ति केन्द्र स्थापित करने के साथ ही जिन राज्यों द्वारा नशाखोरी के विरूद्ध सफलता प्राप्त की गयी है ऐसे राज्यों में संयुक्त टीम भेजी जाय, जो राज्यों द्वारा नशाखोरी के विरूद्ध अपनाये गये साधनों का परीक्षण एवं अध्ययन कर राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप क्रियान्वित किये जाने के सम्बन्ध में अपनी कार्यवाही रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिये।