पहाडी़ व मैदानी मशरूम की खेती को नए मुकाम देगा SGRR विश्वविद्यालय

मशरूम रोजगार मेले में विश्वविद्यालय के 16 छात्र छात्राएं चयनित,
उत्तराखण्ड में मशरूम की खेती को प्रोत्साहित करने में SGRR विश्वविद्यालय का सार्थक प्रयास
देहरादून (गढ़वाल का विकास न्यूज)। मशरूम उत्पादन व मशरूम को बाज़ार उपलब्ध करवाने के लिए देहरादून शहर नई भूमिका में तैयार किया जा रहा है। SGRR विश्वविद्यालय का स्कूल आॅफ एग्रीकल्चर साइंसेज़ मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में वृहद पैमाने पर कार्य कर रहा है। मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में छात्र-छात्राओं एवम् युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से विशेष प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। मंशा यह है कि युवाओं को कृषि रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें, पहाडों से पलायन रोकने में भूमिका तैयार की जाए व पहाड़ों में मशरूम की पैदावार को देहरादून में बाजार उपलब्ध करवाकर स्थानीय कृषकों को बड़ी राहत दी जाए।
विश्वविद्यालय के स्कूल आॅफ एग्रीकल्चर के बैनर तले मशरूम लैब संचालित है। विशेषज्ञ कृषि वैज्ञानिकों की देख रेख में चल रही इस लैब में मशरूम की कई प्रजातियों को उगाया जा रहा है। मुख्य रूप से श्वेत बटन मशरूम एवम् डिंगरी मशरूम की पैदावार पर विशेष कार्य किया जा रहा है। मशरूम के क्षेत्र में विश्वविद्यालय अब तक कई उपलब्धियां हासिल कर चुका है, जिसमें मशरूम रोजगार मेला 2020 का आयोजन विशेष रूप से शामिल है। इसके तहत विश्वविद्यालय द्वारा दर्जनों मशरूम उत्पादन कंपनियों को विश्वविद्यालय में बुलाया गया तथा कैंपस प्लेसमेंट के जरिए काफी संख्या में छात्र छात्राओं का चयन भी हुआ। मशरूम रोजगार से जुड़े रोजगार द्वारा मशरूम मेले में स्टाॅल भी लगाए गए। मशरूम मेले में छात्रा दीक्षी चैहान, कुशाग्र चैधरी, सिमरन तोमर, एनार्स काॅन्सटैंस, नम्रता व्यास, शिवम मित्तल, रानी रावत, शिवांगी पाण्डे, पुरुषोत्तम कुमार, श्रद्धा सूद, आयुष उनियाल, पुरुषोत्तम उपाध्याय, सचिन पुरोहित, अरुण गुप्ता, शदर चैधरी, अज़हर आलम आदि काा कैंपस स्लेक्शन हुआ।
मशरूम से बने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय ने हैंज़न इंटरनेशनल नामक मशरूम उत्पादक कंपनी के साथ एमओयू किया हुआ है। इसके तहत छात्र-छात्राओं को साधे इंडस्ट्री से रूबरू होने का मौका मिल रहा है व बाजार की मांग के अनुरूप मशरूम से बने उत्पादों की जानकारी भी ले पा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक एवम् समन्वयक मशरूम लैब श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय डाॅ दीपक सोम व कृषि वैज्ञानिक डाॅ हितेन्द्र कुमार ने जानकारी दी कि देहरादून का मौसम मशरूम उत्पादन के लिए काफी अनुकुल माना जाता है। मशरूम की मुख्य प्रजातियों के उत्पादन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समन्वय कर उत्कृष्ट प्रजाति की मशरूम देहरादून में उगाई जा सकती है। देहरादून मशरूम उत्पादन व बिक्री के लिए बड़े बाजार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
हम गढ़वाल व कुमाउं के सुदूर क्षेत्रों के किसानों के सम्पर्क में हैं जो लोग दूरवर्ती क्षेत्रों में मशरूम नहीं बेच पाते हैं विश्वविद्यालय उनसे मुनासिब दामों पर मशरूम खरीदकर बाजार उपलब्ध कराएगा। विश्वविद्यालय में मशरूम समन्वयक डाॅॅ दीपक सोम द्वारा अब तक 200 से अधिक छात्र-छात्राओं को मशरूम प्रशिक्षण दिया जा चुका है और आने वाले समय में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रहेंगे।
मशरूम उत्पादन में स्वरोजगार की अपार सम्भावनाएं
श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय कृषि विभाग की डीन इंचार्ज डाॅ मनीषा सिंह ने जानकारी दी कि मशरूम उत्पादन में विशेष ट्रेनिंग हासिल छात्र-छात्राएं स्वरोजगार के स्वर्णिम अवसर तैयार किया जा सकते हैं। हमारे यहां विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के साथ साथ, उत्तराखण्ड के सदूर क्षेत्रों के किसानों व आम जन को भी मशरूम उत्पादन में विशेष ट्रेनिंग उपलब्ध कराई जा रही है।
विवि छात्रों को रोजगार एवम् कौशल विकास पर आधारित शिक्षा पर दे रहा जोर: डा. रावत
श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के कुलपति डा. यू.एस. रावत ने कहा कि विवि छात्रों को रोजगार एवम् कौशल विकास पर आधारित शिक्षा पर जोर दे रहा है। इसी का परिणाम है कि हाल ही में मशरूम रोजगार मेले का आयेाजन किया गया जिसमें मशरूम क्षेत्र की विभिन्न संस्थाओं एवम् उ़द्यमियों व किसानों पे प्रतिभाग किया तथा छात्रों के लिए परिसर साक्षात्कार के माध्यम से 16 छात्रों का चयन भी किया गया। इसी प्रकार विश्वविद्यालय जैविक खेती के विभिन्न पहलुओं अनुसंधान एवम् कृषि उत्पादन में भी छात्रों एवम् किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है।

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