देहरादून (गढ़वाल का विकास न्यूज)। राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी मन्जू बहन ने सत्संग में मौजूद जनसमूह को श्रेष्ठ संस्कार निर्माण की सहज विधि समझाई।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवाकेन्द्र सुभाष नगर देहरादून के सभागार में आयोजित सत्संग में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी मन्जू बहन ने कहा कि जब हम धार्मिक स्थल पर जाते हैं, तो पवित्रता का अनुभव करते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य के निकट शांति की अनुभूति होती है। वातावरण के गुण को हम इसलिये महसूस कर पाते हैं क्योंकि वह गुण हमारे भीतर भी है। वातावरण हमारे भीतर के उस गुण को ट्रिगर कर देता है। जैसे खुद को बचाने के लिये हम कह देते हैं हम तो शांत थे, किंतु उसने ऐसे गुस्से से बात की, कि हमारा क्रोध भी ट्रिगर हो गया। सोचने की बात है कि यदि हमारे में क्रोध का संस्कार हो ही नहीं तो हमें क्रोध कैसे आयेगा।
उनका कहना था कि आत्मा के कैसेट में यदि कोई गाना है ही नहीं, तो कितना भी बटन दबाओ, वो गाना बजेगा कैसे। वैसे ही यदि हम किसी गाने (संस्कार) को पसंद नहीं करते, तो उसके ऊपर नया गाना (संस्कार) भर सकते हैं। वातावरण उसमें सहायता कर सकता है। परंतु हम शांति, पवित्रता, प्यार, खुशी और शक्ति जैसे संस्कारों के विकास व अनुभूति के लिये बार-बार ऐसी जगह या ऐसे लोगों के पास नहीं जा पाते। पर ईश्वर के पास तो कभी भी कितने भी समय के लिये जा सकते हैं। राजयोग द्वारा मन-बुद्धि के थ्रू ईश्वर की समीपता अनुभव की जा सकती है। इस समीपता से श्रेष्ठ संस्कारों रूपी गाना भी आत्मा में सहज भरा जा सकता हैं।
इस अवसर पर पदमा जी, प्रियंका जी, पुष्पा जी, विनय जी, राकेश जी, ममता जी, सुरेन्द्र जी, उषा जी, रेणू जी, विजयलक्ष्मी आदि मौजूद थे।