देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पूर्व सीएम हरीश रावत पर निजी चीनी मिलों का प्रवक्ता बन जाने का आरोप लगाया है। सीएम ने कहा कि उन्हें निजी चीनी मिल मालिकों का हित सवरेपरि लग रहा है। यदि हरीश रावत किसानों के सच्चे हितैषी है तो उन्हें निजी चीनी मिलों के बाहर धरना देना चाहिए। साथ ही हरीश रावत को यह भी बताना चाहिए कि जब वे सीएम थे तो तब उन्होंने गन्ना किसानों के लिये क्या किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रदेश की सहकारी व सरकारी चीनी मिलों द्वारा पेरे गये समस्त गन्ना मूल्य का भुगतान किसानों को कर दिया है। यही नही सरकार ने किसानों को धान के मूल्य का भुगतान भी रिकार्ड 10 दिन में किया है।
सरकार सहकारी चीनी मिलों का कर चुकी है पूर्ण भुगतान : पंत
गन्ना विकास मंत्री प्रकाश पंत ने कहा है कि राज्य सरकार अपने वायदे के अनुरूप गन्ना किसानों का भुगतान करने को लेकर गंभीरता से काम कर रही है। सहकारी व सार्वजनिक क्षेत्र की चीनी मिलों का पिछले पेराई सत्र 2017-18 का सम्पूर्ण 440.41 करोड़ का भुगतान कर दिया गया है। पंत ने कहा कि वे इस मामले में सदन में पूरी बात रखना चाहते थे, लेकिन विपक्ष के हंगामे के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र की चीनी मिलों द्वारा पेराई सत्र 2017-18 में कुल 270.26 लाख टन गन्ने की पेराई की गयी, जिसका भुगतान 851.98 करोड़ बना। सरकार ने अब तक 655.18 करोड़ का भुगतान करा दिया है। पंत ने बताया कि निजी मिल मालिकों को भुगतान के लिए दबाव बनाया गया है। उनकी आरसी काटी गयी है। एक मिल में तो सरकार ने रिसीवर भी बिठा दिया है और जो भी आय हो रही है, उससे किसानों का भुगतान किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार गन्ना मिलों की आय बढ़ाने के लिए इथनोल का उत्पादन करने के लिए पहल कर चुकी है। उन्होंने विपक्ष पर गैरजिम्मेदाराना व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के द्वारा इतना कुछ करने के बाद भी इस मुद्दे पर विपक्ष ने सदन की कार्यवाही को बाधित किया।