हिमालयी राज्य पहली दफा तैयार करेंगे संयुक्त मसौदा
देहरादून (गढ़वाल का विकास न्यूज)। विकास के मामले में करीबन एक जैसे हालातों से सामना कर रहे देश के 11 हिमालयी राज्य पहली बार आज मसूरी में विभिन्न मुद्दों पर मंथन करने के लिए जुटे हैं। राज्यों के बीच इस मंथन में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ ही नीति आयोग और वित्त आयोग के भी सदस्य शामिल हुए हैं।
देश के 11 हिमालयी राज्य अपनी साझा समस्याओं, सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरणीय महत्व और विशिष्ट भौगोलिक परिवेश की पृष्ठभूमि में विकास की दौड़ में पिछड़ेपन के ठप्पे से उबरने के लिए रविवार को पहाड़ों की रानी मसूरी में हिमालयन कॉन्क्लेव में एकजुट हुए। मसूरी में इन राज्यों की ओर से पहली दफा संयुक्त मसौदा तैयार किया जा रहा है। इसे केंद्र सरकार के साथ ही 15वें वित्त आयोग और नीति आयोग के सुपुर्द किया जाएगा। नीति आयोग हिमालयी राज्यों के लिए अलग प्रकोष्ठ गठित कर चुका है। ऐसे में इस मसौदे को हिमालयी राज्यों के लिए पृथक नीति नियोजन की जरूरत की पैरवी की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है। 
हिमायलन राज्यों के इस सम्मेलन का उद्घाटन केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा किया गया। इस मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। हिमालयी राज्यों के कॉन्क्लेव में शामिल होने के लिए 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सहमति जाहिर की थी। इनमें से अधिकतर राज्यों के मुख्यमंत्री पहुंच भी चुके हैं। जो नहीं पहुंच पा रहे हैं उनकी ओर से किसी न किसी तरह से प्रतिनिधित्व तय कर दिया गया है।
हिमालयी राज्यों के सामने कई चुनौतियां हैं। इनमें सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी के मद्देनजर ग्रीन बोनस, पर्यटन एवं वेलनेस, आपदा प्रबंधन, पलायन आदि मुद्दों पर इस कॉन्क्लेव में चर्चा होगी। इसके अलावा भारत की अधिकतर नदियों का स्रोत हिमालय है। इसलिए प्रधानमंत्री के जल संचय अभियान में हिमालयी राज्यों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। जल संरक्षण में राज्य किस तरह सहयोग कर सकते हैं, इस पर भी मंथन होगा। कॉन्क्लेव में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज धन्यवाद ज्ञापित करेंगे।

ये हैं 11 हिमालयी राज्य
उत्तराखंड, हिमाचल, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, अरुणाचल, असम, नागालैंड, सिक्किम व जम्मू.कश्मीर।