देहरादून, गढ़वाल का विकास डॉट कॉम। उत्तराखंड के विभिन्न महाविद्यालयों में चल रहे छात्र संघ चुनावों के बीच कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि छात्र संघ चुनावों में कांग्रेस समर्थित छात्र नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को दबाव में लेने, डराने तथा गिरफ्तार करने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
महानगर कांग्रेस कमेटी देहरादून के जिलाध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने कहा कि छात्र संघ चुनाव केवल महाविद्यालयों में प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि युवाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ने और उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया के दौरान पुलिस अथवा प्रशासनिक तंत्र का किसी राजनीतिक उद्देश्य से इस्तेमाल किए जाने के आरोप बेहद गंभीर हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र संगठन के नेताओं, प्रत्याशियों या कार्यकर्ताओं को अनावश्यक रूप से पूछताछ, गिरफ्तारी, मुकदमों अथवा पुलिस कार्रवाई के माध्यम से दबाव में लाने का प्रयास किया जा रहा है, तो यह निष्पक्ष छात्र संघ चुनाव की भावना के विपरीत है। चुनाव मैदान में सभी प्रत्याशियों और संगठनों को समान अवसर मिलना चाहिए तथा छात्रों को बिना किसी भय या दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग करने दिया जाना चाहिए।
डॉ. गोगी ने कहा कि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किसी भी राजनीतिक या संगठनात्मक हित के लिए नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निष्पक्ष वातावरण सुनिश्चित करने के लिए होना चाहिए। विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में पुलिस की भूमिका शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने तक सीमित रहनी चाहिए, न कि किसी छात्र संगठन को कमजोर करने के आरोपों का कारण बननी चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्र लोकतंत्र की बुनियादी समझ विकसित करने वाली सबसे महत्वपूर्ण पीढ़ी हैं। उनके लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का दबाव लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए उचित संदेश नहीं देता।
डॉ. गोगी ने कहा कि कांग्रेस छात्र हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दे पर अपनी आवाज मजबूती से उठाती रहेगी। यदि छात्र संघ चुनावों को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक अथवा पुलिस तंत्र के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आती हैं, तो कांग्रेस लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से इसका विरोध करेगी।
उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए और उन्हें स्वतंत्र एवं निष्पक्ष वातावरण में अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिलना चाहिए।