पौड़ी। जिला प्रशासन अब खनन के प्रकरणों पर नकेल कसने की तैयारियों में जुट गया है। अब खनन से प्राप्त सामग्री पर आॅनलाइन रवन्ना प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। जिला प्रशासन ने जियोलाॅजी एंड माइनिंग यूनिट उत्तराखंड के साथ मिलकर इस कार्य की सभी तैयारियों को पूरा कर लिया है। अब राजस्व विभाग के सभी अधिकारी मोबाइल फोन पर ही अवैद्य रवन्नों पर नजर रख सकेंगे। विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी सुशील कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में खनन से प्राप्त सामग्री के रवन्नों की आॅनलाइन प्रक्रिया की तकनीकी जानकारियां दी गई। जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों तथा तहसीलदारों समेत अन्य को खनन की आॅनलाइन प्रक्रिया को अपनाये जाने को कहा। उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों को मोबाइल के माध्यम से भी खनन की गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिये। इस मौके पर भूतल एवं खनिज कार्य इकाई के उप निदेशक जीडी प्रसाद तथा दिनेश कुमार ने दृश्य एवं श्रव्य के माध्यम से ईरवन्ना प्रक्रिया की तकनीकी जानकारियां दी। उन्होंने बताया कि खनन के क्षेत्र में रवन्ना को लेकर कई प्रकार की खामियां पायी जाती हैं। इसके अलावा अवैद्य रवन्नों से राजस्व को भारी नुकसान भी होता है। लेकिन जियोलाॅजी एंड माइनिंग यूनिट उत्तराख्ंाड ने रवन्ना आदि गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए खनन क्षेत्र की सभी प्रक्रियाओं को आॅनलाइन कर दिया है। जिससे खनन क्षेत्र में जुड़े अवैद्य खनन उद्यमी की गतिविधियों पर नकेल सकी जा सकती है। उन्होंने बताया कि अब पारम्परिक रवन्ना की जगह ई रवन्ना का प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ईरवन्ना को बेसिक मोबाइल या इंटरनेट नहीं होने की दशा में एसएमएस के माध्यम से भी आॅपरेट किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि माइनिंग के लिए अलग से पोर्टल बनाया गया है। जिसमें वर्ष भर कितना खनन किस क्षेत्र में हुआ आदि का पता पोर्टल के माध्यम से भी लगाया जा सकेगा। इस मौके पर जिलाधिकारी ने शीघ्र ही इस प्रणाली को साधारण दिन चर्चा में शामिल करने को कहा। उन्होंने कहा कि ईरवन्ना होने से जिले के राजस्व में भी वृद्धि होगी। इस मौके पर अपर जिलाधिकारी रामजी शरण शर्मा, एसडीएम सदर केएस नेगी, एसडीएम कोटद्वार राकेश तिवारी, एसडीएम श्रीनगर एमडी जोशी, एसडीएम थलीसैंण कमलेश मेहता, एसडीएम लैंसडोन सोहन सिंह सैनी समेत विभिन्न तहसीलों के तहसीलदार व अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।