देहरादून (गढ़वाल का विकास न्यूज)। मानव भारती देहरादून और पटना के बच्चों ने जागर सम्राट पद्मश्री प्रीतम भरतवाण से संवाद किया। बच्चों ने उनसे उत्तराखंड की लोक कला, संगीत और वाद्य यंत्रों के बारे में बात की। वहीं श्री भरतवाण ने भी बच्चों से पूछा कि वो क्या बनना चाहते हैं। साथ ही संदेश दिया कि किसी की देखा देखी में कुछ बनने का प्रयास करने से ज्यादा अच्छा यह है कि आप अपने नैसर्गिक गुणों को पहचाने और परिश्रम करके सफलता हासिल करें।
मानवभारती उत्तराखंड बिहार कम्युनिटी इंगेजमेंट प्रोग्राम के तहत पटना से 30 बच्चों और शिक्षकों का दल उत्तराखंड के भ्रमण पर है। शनिवार शाम मानव भारती स्कूल नेहरू कालोनी में बच्चों का जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्वागत और दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम के बाद संबोधित करते हुए श्री भरतवाण ने कहा कि जीवन में वही काम करना चाहिए, जिसको करने के लिए मन से प्रेरणा मिलती है। हर व्यक्ति किसी ने किसी नैसर्गिक गुण वाला होता है, जरूरत है पहचान करने की और परिश्रम और लगन से आगे बढ़कर सफलता हासिल करने की। देखा देखी नहीं करनी चाहिए, सीखना चाहिए। इस मौके पर उपस्थितजनों के आग्रह पर जागर सम्राट श्री भरतवाण ने मां जगदंबा को याद करते हुए जागर की प्रस्तुति दी।
उन्होंने कहा कि मां की आराधना मंगल करती है। संवाद कार्यक्रम में देहरादून के दिव्यांशु के सवाल पर उन्होंने कहा कि कलाकार को अपनी सभी रचनाएं बहुत पसंद होती हैं। उन्होंने गीत ‘सरुली मेरू जिया लगीगे, तेरी रौंतेली मुखड़ी मां…’सुनाया। बच्चों और शिक्षकों ने तालियां बजाकर उनका साथ दिया। पटना से आए अक्षत ने उनसे पूछा कि आपको इंस्ट्रमेंट और गीत में कौन सबसे ज्यादा पसंद है। श्री भरतवाण ने कहा, मुझे दोनों बहुत पसंद हैं, क्योंकि इंस्ट्रूमेंट और गीत दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। देहरादून के शौर्य के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो भी कार्य करो, मन से करो। सफलता आपका इंतजार करेगी।
इस अवसर पर श्री भरतवाण को दो पौधे भेंट किए गए, जो उन्होंने पटना और देहरादून के बच्चों को सौंपे। पटना और देहरादून में श्री भरतवाण के नाम पर पौधे लगाए जाएंगे। 11 सितंबर को पटना और देहरादून में उनका जन्मदिन मनाया जाएगा। मानव भारती के मार्गदर्शक प्रो, राजेश्वर मिश्रा ने उनको स्मृति चिह्न प्रदान करके सम्मानित किया। इस मौके पर मानव भारती के अध्यक्ष रजत मिश्रा, मानवभारती स्कूल देहरादून के निदेशक डॉ. हिमांशु शेखर, पटना के निदेशक प्रदीप कुमार, पटना की प्रिंसिपल सुजाता बधानी, देहरादून के प्रिंसिपल राजीव सिंघल, सलाहकार जगन्नाथ प्रसाद, विकास झा सहित सभी शिक्षक और बच्चे उपस्थित रहे। संचालन शिक्षक डॉ. अनंतमणि त्रिवेदी और शिक्षक धर्मेंद्र ने किया।